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"मैं रात भर रोती थी, लेकिन हार नहीं मानी": विद्या बालन ने साझा किया अपने करियर का सबसे बुरा दौर

मुंबई, 15 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री विद्या बालन, जो आज अपनी दमदार एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं, ने हाल ही में अपने करियर के उस 'अंधेरे दौर' के बारे में खुलकर बात की है जब उन्हें लगातार असफलता और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

संघर्ष के वो दिन: जब हाथ से निकल गई थीं 12 फिल्में

विद्या ने बताया कि उनके करियर की शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण रही। एक समय ऐसा था जब उन्हें 12 फिल्मों से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने उस दर्द को याद करते हुए कहा:

"मैं अक्सर रोते हुए सोने जाती थी। मुझे लगता था कि शायद मेरे लिए रास्ते बंद हो गए हैं। लेकिन अगले दिन मैं फिर से एक नई उम्मीद के साथ उठती थी।"

चेन्नई की वो घटना जिसने झकझोर दिया

विद्या ने एक पुरानी घटना साझा की जब उन्हें एक तमिल फिल्म से रिप्लेस किया गया था। उ Read more...

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सावधान! आपके नाखून दे रहे हैं शरीर की गंभीर बीमारियों का संकेत, डॉक्टर ने बताए 5 बड़े लक्षण

मुंबई, 31 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) हमारे नाखून अक्सर हमारी सेहत का आईना होते हैं। कई बार हम नाखूनों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन ये बदलाव शरीर में पनप रही किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। हाल ही में एक अमेरिकी डॉक्टर ने नाखूनों में होने वाले 5 ऐसे बदलावों के बारे में बताया है, जो स्वास्थ्य के प्रति सचेत करने वाले 'अलार्म' की तरह काम करते हैं।

एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और दर्द निवारक विशेषज्ञ डॉ. कुणाल सूद ने साझा किया है कि ये बदलाव अन्य लक्षणों के प्रकट होने से कई महीने पहले ही दिखाई दे सकते हैं:

1. क्लबिंग (नाखूनों का मुड़ना)

अगर आपके नाखून नीचे की ओर मुड़ने लगे हैं और उंगलियों के पोर (fingertips) गोल और सूजे हुए दिखने लगे हैं, तो इसे 'क्लबिंग' कहते हैं। यह फेफड़ों की गंभीर बीमारी, हृदय संबंधी समस्याओं या लिवर में खराबी का संकेत हो सकता है।

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एंटी-एजिंग के दीवाने ब्रायन जॉनसन का 'पावर लंच': हर कैलोरी के लिए करनी पड़ती है मशक्कत, जानें क्या है खास

मुंबई, 31 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) अपनी उम्र को थामने (Anti-aging) के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने वाले अमेरिकी अरबपति ब्रायन जॉनसन एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी उम्र को रिवर्स करने के मिशन 'प्रोजेक्ट ब्लूप्रिंट' के तहत जॉनसन ने हाल ही में अपने दोपहर के भोजन (Lunch) का विवरण साझा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी डाइट में शामिल "हर एक कैलोरी को अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।"

क्या है जॉनसन का खास 'सुपर वेजी' लंच?

47 वर्षीय ब्रायन जॉनसन ने सोशल मीडिया पर अपने लंच की फोटो साझा की, जिसे वह 'सुपर वेजी' (Super Veggie) कहते हैं। इस भोजन की खासियत यह है कि इसमें पोषण का बारीकी से ध्यान रखा गया है और इसमें कोई भी 'खाली कैलोरी' नहीं है। उनके लंच में मुख्य रूप से ये चीजें शामिल होती हैं:
  • काली दाल (Black Lentils): प्रोटीन और फाइबर का मुख्य स्रोत।
  • सब्जियाँ: इसमें उबली हुई ब्रोकली, फूलगोभी Read more...

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विक्टोरिया बेकहम ने साझा किए अपनी शादी के राज: कहा- '26 साल में अगर आप नहीं बदले, तो समस्या है'

मुंबई, 15 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) दुनिया के सबसे चर्चित जोड़ों में से एक, विक्टोरिया बेकहम और पूर्व फुटबॉलर डेविड बेकहम की शादी को 26 साल पूरे हो चुके हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू और अपनी नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री के दौरान विक्टोरिया ने उन सीखों के बारे में बात की है, जिन्होंने उनके रिश्ते को समय की कसौटी पर खरा उतारा।

बदलाव ही विकास की कुंजी है

विक्टोरिया ने एक गहरी बात साझा करते हुए कहा कि एक लंबे रिश्ते में बदलाव बेहद जरूरी है। उनके अनुसार:

"यदि आप 26 साल की शादी के बाद भी वही इंसान हैं जो आप शुरुआत में थे, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं समस्या है। एक साथ आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि आप एक पार्टनर और एक व्यक्ति के रूप में विकसित (evolve) हों।"

चुनौतियों का मिलकर सामना

अतीत में रहे कथित अफेयर के दावों और मीडिया क Read more...

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जापानी दर्शन 'Mono no Aware' कैसे बदल सकता है आपके काम करने का अंदाज़, आप भी जानें

मुंबई, 30 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) आज की भागदौड़ भरी 'हसल कल्चर' (Hustle Culture) और काम के दबाव के बीच, जापानी दर्शन 'Mono no Aware' (मोनो नो अवेयर) कैरियर में सार्थकता और मानसिक शांति खोजने का एक नया रास्ता दिखा रहा है।

क्या है 'Mono no Aware'?

इसका शाब्दिक अर्थ है "चीजों का मर्म" या "अनित्यता के प्रति जागरूकता"। यह दर्शन हमें सिखाता है कि जीवन और अनुभव क्षणभंगुर (temporary) हैं। जैसे चेरी ब्लॉसम के फूलों का गिरना उदासी के साथ-साथ उनकी सुंदरता का भी एहसास कराता है, वैसे ही यह दर्शन हमें समय के बीतने और बदलाव को स्वीकार करना सिखाता है।

कार्यस्थल (Workplace) में यह कैसे मददगार है?
  • क्षणभंगुर पलों में अर्थ खोजना: काम केवल लक्ष्य पाने का जरिया नहीं, बल्कि खुद में एक अनुभव है। यह दर्शन हमें सिखाता है कि हम हर प्रोजेक्ट या चुनौती को पूरी जागरूकता के साथ स्वीकार क Read more...

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