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चेहरे की सूजन (Puffiness) से हैं परेशान? अपनाएं 'ठंडी चम्मच' वाला यह आसान नुस्खा और अन्य घरेलू उपाय

सुबह सोकर उठने के बाद कई बार हमारा चेहरा और आँखें सूजी हुई नजर आती हैं। इसे 'पेशियल पफिनेस' (Facial Puffiness) कहा जाता है, जो खराब नींद, नमक के अधिक सेवन या डिहाइड्रेशन के कारण हो सकती है। इसे दूर करने के लिए सोशल मीडिया पर 'ठंडी चम्मच' (Chilled Spoon Trick) का नुस्खा काफी लोकप्रिय हो रहा है।
क्या है 'ठंडी चम्मच' वाला नुस्खा?
यह तरीका बेहद सरल और प्रभावी है। इसके लिए आपको बस दो धातु की चम्मचों को कुछ मिनट के लिए फ्रीजर में रखना होगा। जब वे ठंडी हो जाएं, तो उनके घुमावदार हिस्से को अपनी आँखों के नीचे और सूजे हुए हिस्सों पर हल्के से दबाएं।
यह कैसे काम करता है?
ठंडक के संपर्क में आने से चेहरे की रक्त वाहिकाएं (Blood vessels) सिकुड़ जाती हैं, जिससे सूजन कम होती है। यह 'लिम्फैटिक ड्रेनेज' में भी मदद करता है, जिससे चेहरे पर जमा अतिरिक्त तरल पदार्थ निकल जाता है और त्वचा में कसावट आती है।
सूजन कम करने के अन्य तरीके:Read more...

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आपकी असली उम्र क्या है? जानिए 'बायोलॉजिकल' और 'क्रोनोलॉजिकल' एज का अंतर और दिल की सेहत पर इसका असर

अक्सर जब कोई हमसे हमारी उम्र पूछता है, तो हम अपनी जन्मतिथि के हिसाब से साल गिनकर बता देते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस की भाषा में यह आपकी केवल एक उम्र है। डॉक्टरों और कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञों) के अनुसार, हर इंसान की दो तरह की उम्र होती है—एक क्रोनोलॉजिकल एज (Chronological Age) और दूसरी बायोलॉजिकल एज (Biological Age)। हमारे दिल की सेहत और लंबी उम्र का सीधा संबंध हमारी बायोलॉजिकल उम्र से होता है।
आइए समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और आप अपनी आदतों को सुधारकर कैसे हमेशा जवान और सेहतमंद रह सकते हैं।
क्या है दोनों उम्र में अंतर?
  • क्रोनोलॉजिकल एज (Chronological Age): यह वह उम्र है जो आपके कैलेंडर या बर्थ सर्टिफिकेट के हिसाब से तय होती है। उदाहरण के लिए, यदि आपका जन्म 1996 में हुआ था, तो साल 2026 में आपकी क्रोनोलॉजिकल उम्र 30 साल होगी। इसे बदला नहीं जा सकता।
  • बायोलॉजिकल एज (Biological Age): इसे 'फिजिकल' य Read more...

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किचन हैक: प्याज और लहसुन की जिद्दी गंध से हाथों को कैसे छुड़ाएं? एक्सपर्ट ने बताए आसान तरीके

रसोई में खाना बनाते समय प्याज और लहसुन का इस्तेमाल आम बात है, लेकिन इन्हें काटने के बाद हाथों में आने वाली तीखी गंध अक्सर साबुन से धोने के बाद भी नहीं जाती। यह गंध घंटों तक बनी रह सकती है जो काफी परेशान करने वाली होती है। हाल ही में विशेषज्ञों ने इस समस्या से निपटने के लिए कुछ प्रभावी और आसान घरेलू नुस्खे साझा किए हैं।
क्यों आती है हाथों से गंध?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्याज और लहसुन में सल्फर युक्त यौगिक होते हैं। जब हम इन्हें काटते हैं, तो ये यौगिक त्वचा के साथ चिपक जाते हैं और पानी या साधारण साबुन से आसानी से नहीं निकलते।
गंध दूर करने के प्रभावी उपाय:
1. स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) का जादू
यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन स्टेनलेस स्टील की किसी वस्तु (जैसे चम्मच या नल) पर अपने हाथों को रगड़ने से गंध दूर हो सकती है। स्टील में मौजूद क्रोमियम लहसुन के सल्फर अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करता है, जिससे Read more...

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कुत्ते और बिल्ली बन सकते हैं पक्के दोस्त; ये हैं 5 सबसे मिलनसार डॉग ब्रीड्स जो बिल्लियों के साथ आसानी से घुल-मिल जाती है...

"कुत्ते और बिल्ली की दुश्मनी" एक ऐसी कहावत है जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। अक्सर माना जाता है कि ये दोनों जानवर एक छत के नीचे शांति से नहीं रह सकते। लेकिन विशेषज्ञों और पेट-पेरेंट्स का मानना है कि सही ट्रेनिंग और सही ब्रीड (नस्ल) के चुनाव से कुत्ते और बिल्ली न सिर्फ साथ रह सकते हैं, बल्कि पक्के दोस्त भी बन सकते हैं।
यदि आपके घर में पहले से ही एक बिल्ली है और आप एक कुत्ता लाने की सोच रहे हैं, या दोनों को एक साथ पालना चाहते हैं, तो यहाँ कुत्तों की 5 ऐसी सबसे मिलनसार नस्लों (Dog Breeds) के बारे में बताया गया है जो बिल्लियों के साथ बहुत प्यार से रहती हैं:
1. गोल्डन रिट्रीवर (Golden Retriever)
गोल्डन रिट्रीवर अपनी बुद्धिमत्ता, शांत स्वभाव और बेहद मिलनसार व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। ये कुत्ते स्वभाव से बहुत कोमल होते हैं और इनमें बिल्ली जैसे छोटे जानवरों पर हमला करने की प्रवृत्ति (Prey Drive) न के बराबर होती है। अपनी केयरिंग और प्रोटेक्टिव Read more...

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भारतीय कौवे दुनिया के सबसे बुद्धिमान पक्षियों में शामिल: शोध में हुआ बड़ा खुलासा, आप भी जानें

मुंबई, 23 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) अक्सर शोर मचाने वाले और सामान्य समझे जाने वाले भारतीय कौवे (Indian Crows) वास्तव में दुनिया के सबसे बुद्धिमान पक्षियों की श्रेणी में आते हैं। हाल ही में 'इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने पाया है कि कौवों की मानसिक क्षमता कुछ स्तनधारी जीवों (Mammals) के बराबर होती है।

इंसानी बच्चों जैसी समझ विशेषज्ञों के अनुसार, कौवों में समस्या सुलझाने (Problem-solving) का कौशल गजब का होता है। उनकी संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive skills) की तुलना अक्सर 4 से 5 साल के मानवीय बच्चे से की जाती है। वे न केवल पेचीदा पहेलियां सुलझा सकते हैं, बल्कि भविष्य की योजना बनाने और 'कारण और प्रभाव' (Cause and Effect) के संबंधों को समझने में भी सक्षम होते हैं।

औजार बनाने और इस्तेमाल करने में माहिर अध्ययन में यह भी सामने आया है कि कौवे केवल प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल ही नहीं करते, बल्कि वे Read more...

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